Mohamed Muizzu: मालदीव के राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज़ू का नई दिल्ली के साथ संबंध कैसा रहा?

Mohamed Muizzu: मालदीव के राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज़ू का नई दिल्ली के साथ संबंध कैसा रहा?

Mohamed Muizzu: मोहम्मद मुइज़ू मालदीव के वर्तमान राष्ट्रपति हैं। वे 30 सितंबर, 2023 को हुए राष्ट्रपति चुनाव में विजयी हुए थे। मुइज़ू पीपुल्स नेशनल कांग्रेस (पीएनसी) के सदस्य हैं। वे पहले भी 2013 से 2018 तक मालदीव के राष्ट्रपति रहे थे।

Mohamed Muizzu
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मुइज़ू का जन्म 1967 में माले में हुआ था। उन्होंने माले विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने 1994 से 2008 तक मालदीव के सशस्त्र बलों में सेवा की।

मुइज़ू एक रूढ़िवादी मुस्लिम हैं। उनके राष्ट्रपति पद के अभियान को धार्मिक तत्वों ने समर्थन दिया था। मुइज़ू ने अपने अभियान में वादा किया था कि वह मालदीव में इस्लाम को मजबूत करेंगे और देश को पश्चिमी प्रभाव से बचाएंगे।

Mohamed Muizzu के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के साथ संबंध

Mohamed Muizzu के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और मालदीव के बीच संबंधों में कुछ तनाव देखा गया है। मुइज़ू ने अपने अभियान में भारतीय सैनिकों को मालदीव से हटाने का वादा किया था। उन्होंने भारत की ओर से लक्षद्वीप को पर्यटन के लिए बढ़ावा देने के कदमों पर भी आपत्ति जताई है।

Mohamed Muizzu
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भारत ने मुइज़ू के राष्ट्रपति बनने के बाद मालदीव के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने की कोशिश की है। भारत ने मुइज़ू से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत ने मालदीव को आर्थिक सहायता भी प्रदान की है।

हालांकि, मुइज़ू के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और मालदीव के बीच संबंधों में कुछ बदलाव भी देखने को मिले हैं। मुइज़ू ने भारत के साथ कुछ समझौतों को रद्द कर दिया है। उन्होंने भारत के साथ रक्षा सहयोग को भी कम करने की कोशिश की है।

मुइज़ू के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के लिए चुनौतियां

मुइज़ू के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत के लिए कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। इनमें से एक चुनौती यह है कि मुइज़ू भारत के साथ अपने संबंधों को कमजोर करने की कोशिश कर सकते हैं। दूसरी चुनौती यह है कि मुइज़ू के राष्ट्रपति बनने से हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति को बढ़ावा मिल सकता है।

भारत को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए मालदीव के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की जरूरत है। भारत को मालदीव को आर्थिक सहायता प्रदान करने और रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए भी काम करना चाहिए।

भारत और मालदीव के बीच हालिया गतिविधियाँ

हाल ही में, भारत और मालदीव के बीच कुछ सकारात्मक गतिविधियाँ हुई हैं। दोनों देशों ने एक नया रक्षा समझौता किया है। इस समझौते के तहत, भारत मालदीव को सुरक्षा सहायता प्रदान करेगा।

दोनों देशों ने एक आर्थिक सहयोग समझौता भी किया है। इस समझौते के तहत, भारत मालदीव को आर्थिक विकास के लिए सहायता प्रदान करेगा।

इन गतिविधियों से यह उम्मीद है कि भारत और मालदीव के बीच संबंधों में सुधार होगा।

भारत के लिए मालदीव का महत्व

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भारत के लिए मालदीव का महत्वपूर्ण सामरिक महत्व है। मालदीव हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप देश है। भारत के लिए मालदीव एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

मालदीव भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार भी है। भारत मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है।

भारत के लिए मालदीव की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। मालदीव में आतंकवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियाँ हैं। भारत मालदीव की सुरक्षा में मदद करता है।

मोहम्मद मुइज़ू के राष्ट्रपति बनने के बाद नई दिल्ली के साथ संबंध

Mohamed Muizzu के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और मालदीव के संबंधों में सुधार हुआ है। दोनों देशों ने सुरक्षा, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

मुइज़ू ने अपने राष्ट्रपति पद के कार्यकाल की शुरुआत में ही भारत की यात्रा की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की।

भारत ने मालदीव को कई विकास परियोजनाओं में सहायता प्रदान की है। इनमें मालदीव के जलमार्गों की सुरक्षा के लिए एक नौसेना बेस का निर्माण, मालदीव के सड़क और पुल निर्माण और मालदीव के स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्रणाली में सुधार शामिल हैं।

हालांकि, भारत और मालदीव के बीच कुछ विवाद भी रहे हैं। इनमें मालदीव में भारतीय सैन्य उपस्थिति और मालदीव के द्वीपों पर चीनी निवेश शामिल हैं।

भारत और मालदीव के बीच विवाद

भारत और मालदीव के बीच प्रमुख विवादों में से एक मालदीव में भारतीय सैन्य उपस्थिति है। भारत मालदीव में एक नौसेना बेस का संचालन करता है, जिसका उपयोग भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए करता है। हालांकि, कुछ मालदीव के लोगों का मानना है कि भारतीय सैन्य उपस्थिति उनके देश की स्वतंत्रता के लिए खतरा है।

मालदीव में चीनी निवेश एक अन्य विवाद का विषय है। चीन मालदीव में कई विकास परियोजनाओं में निवेश कर रहा है, जिनमें एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, एक पोर्ट और एक बिजली संयंत्र शामिल हैं। कुछ भारतीय अधिकारियों का मानना है कि चीनी निवेश मालदीव को चीन के प्रभाव में ला सकता है।

भारत और मालदीव दोनों ही इन विवादों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ विश्वास और सहयोग बढ़ाने के लिए काम करने का वचन दिया है।

निष्कर्ष

Mohamed Muizzu के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और मालदीव के संबंधों में कुछ तनाव देखा गया। लेकिन हाल ही में, दोनों देशों के बीच कुछ सकारात्मक गतिविधियाँ हुई हैं। इन गतिविधियों से यह उम्मीद है कि भारत और मालदीव के बीच संबंधों में सुधार होगा।

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dharati moradiya

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