Ayodhya Mandir: राम मंदिर के भूतल और पहली मंजिल का काम पूरा, रामलला के सिंहासन को सोने से जड़ने का काम शुरू

Ayodhya Mandir: राम मंदिर के भूतल और पहली मंजिल का काम पूरा, रामलला के सिंहासन को सोने से जड़ने का काम शुरू

Ayodhya Mandir: अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर बन रहे भव्य राम मंदिर के भूतल और पहली मंजिल का काम पूरा हो गया है। इस काम को पूरा करने में लगभग 3 साल का समय लगा।

भूतल पर गर्भगृह, अंतराल, और सभा मंडप का निर्माण किया गया है। गर्भगृह में भगवान राम की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। अंतराल में भगवान राम की लीलाओं को दर्शाने वाली नक्काशी की गई है। सभा मंडप में भक्तजनों के बैठने की व्यवस्था की गई है।

Ayodhya Mandir
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पहली मंजिल पर भक्तजनों के लिए प्रसाद ग्रह, पुस्तकालय, और दर्शनार्थियों के लिए विश्रामालय बनाया जाएगा।

राम मंदिर के निर्माण का काम एलएंडटी कंपनी द्वारा किया जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि अब मंदिर के दूसरे तल का काम शुरू किया जाएगा। दूसरे तल पर भी गर्भगृह, अंतराल, और सभा मंडप का निर्माण किया जाएगा।

राम मंदिर के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। मंदिर का निर्माण कार्य 2024 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

राम मंदिर के निर्माण के पूरा होने के बाद यह भारत के सबसे बड़े और सबसे भव्य मंदिरों में से एक होगा। यह मंदिर हिंदुओं के लिए एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल होगा।

राम मंदिर निर्माण के महत्वपूर्ण तथ्य

  • राम मंदिर का निर्माण श्रीरामजन्मभूमि पर किया जा रहा है।
  • मंदिर का निर्माण एलएंडटी कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
  • मंदिर के निर्माण में लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है।
  • मंदिर का निर्माण कार्य 2024 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

राम मंदिर निर्माण के प्रभाव

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राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। यह मंदिर हिंदुओं के लिए एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल होगा। मंदिर के निर्माण से भारत में धार्मिक सद्भाव और एकता को बढ़ावा मिलेगा।

Ayodhya Mandir भूतल का काम

मंदिर के भूतल का काम मार्च 2023 में शुरू हुआ था। इस काम में 120 फीट ऊंचे 24 स्तंभों का निर्माण किया गया है। इन स्तंभों को लाल पत्थर से बनाया गया है। स्तंभों के बीच में लकड़ी की छत बनाई गई है।

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भूतल के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति स्थापित की जाएगी। गर्भगृह की लंबाई और चौड़ाई 36 फीट है। गर्भगृह में संगमरमर की फर्श और लकड़ी की छत है।

भूतल के नृत्य मंडप में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नृत्य मंडप की लंबाई और चौड़ाई 48 फीट है। नृत्य मंडप में संगमरमर की फर्श और लकड़ी की छत है।

भूतल के सभा मंडप में भक्तों के बैठने की व्यवस्था होगी। सभा मंडप की लंबाई और चौड़ाई 120 फीट है। सभा मंडप में संगमरमर की फर्श और लकड़ी की छत है।

Ayodhya Mandir पहली मंजिल का काम

मंदिर की पहली मंजिल का काम जुलाई 2023 में शुरू हुआ था। इस काम में 80 फीट ऊंचे 16 स्तंभों का निर्माण किया जा रहा है। इन स्तंभों को लाल पत्थर से बनाया जा रहा है। स्तंभों के बीच में लकड़ी की छत बनाई जाएगी।

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पहली मंजिल पर रामायण और रामचरितमानस की कथाओं के आधार पर चित्रकारी की जाएगी। इसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, और अन्य पात्रों की छवियां होंगी।

मंदिर के निर्माण के लिए ट्रस्ट ने 500 से अधिक श्रमिकों को काम पर लगाया है। Ayodhya Mandir के निर्माण में 10,000 टन से अधिक लाल पत्थर और 10,000 टन से अधिक लकड़ी का इस्तेमाल किया जाएगा।

मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक ऐतिहासिक घटना है। यह मंदिर हिंदुओं की आस्था का केंद्र बनेगा।

मंदिर के निर्माण में हुई प्रगति

मंदिर के भूतल का निर्माण 2022 में पूरा हुआ था। पहली मंजिल का निर्माण 2023 में पूरा हुआ। Ayodhya Mandir के गर्भगृह, अंतराल और सभा मंडप के निर्माण में नक्काशी का काम 2023 में पूरा हुआ।

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मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किए जा रहे लाल बलुआ पत्थर को राजस्थान से लाया गया है। पत्थरों को कटिंग और ग्राइंडिंग के बाद मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है।

मंदिर के निर्माण के लिए एलएंडटी कंपनी ने एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक से मंदिर की नक्काशी बहुत सुंदर और आकर्षक बनी है।

मंदिर के निर्माण में लगे श्रमिक

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मंदिर के निर्माण में लगभग 5000 श्रमिक लगे हुए हैं। इन श्रमिकों में बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं।

श्रमिकों को मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों को कटिंग और ग्राइंडिंग करने का काम करना है। इसके अलावा, उन्हें मंदिर के स्तंभों और छतों पर नक्काशी का काम भी करना है।

श्रमिकों को मंदिर के निर्माण में लगे रहने के लिए कंपनी द्वारा आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

रामलला के सिंहासन पर सोने की परत चढ़ाने का काम शुरू

अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर बन रहे भव्य राम मंदिर में रामलला के विग्रह के लिए मकराना मार्बल से बने तीन फुट ऊंचे आठ फुट चौड़े सिंहासन पर सोने की परत चढ़ाने का काम शुरू हो गया है। यह काम विशेष तकनीक से किया जा रहा है।

सिंहासन के निर्माण के बाद, विशेषज्ञ कारीगरों ने इसके लिए पूर्वाभ्यास किया। सिंहासन के तय आकार की नापजोख कर काम शुरू कर लिया गया है। जरूरी सोने की खरीद आदि का काम पूरा हो चुका है। मूल चौखटा तैयार कर लिया गया है। अब इस पर सोने के पत्तल जड़ने का काम शुरू कर दिया गया है।

सोने की परत चढ़ाने के लिए पहले तांबे का मूल ढांचा बनाया जाता है। इस ढांचे पर सोने के पत्तल को चढ़ाया जाता है। सोने के पत्तल को चढ़ाने के लिए एक विशेष प्रकार की गोंद का इस्तेमाल किया जाता है।

सोने की परत चढ़ाने के बाद, इसे एक विशेष प्रकार के रसायन से सुरक्षित किया जाता है। इससे सोने की परत लंबे समय तक चमकती रहती है।

सिंहासन पर सोने की परत चढ़ाने का काम पूरी तरह से हाथ से किया जा रहा है। यह एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। उम्मीद है कि यह काम दिसंबर 2023 तक पूरा हो जाएगा।

सोने की परत चढ़ाने के फायदे

सोने की परत चढ़ाने से सिंहासन की सुंदरता और आकर्षण बढ़ जाता है। सोना एक अमूल्य धातु है और यह लंबे समय तक चमकता रहता है। इसलिए, सोने की परत चढ़ाने से सिंहासन का जीवनकाल भी बढ़ जाता है।

रामलला के सिंहासन का महत्व

रामलला के सिंहासन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। माना जाता है कि भगवान राम इस सिंहासन पर विराजमान होंगे। इसलिए, इसका निर्माण बहुत ही भव्य और सुंदर किया जा रहा है।

सोने की परत चढ़ाने से सिंहासन की पवित्रता और महत्ता और भी बढ़ जाएगी।

मंदिर के निर्माण का महत्व

राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक ऐतिहासिक घटना है। यह मंदिर हिंदू संस्कृति और धर्म का प्रतीक है। मंदिर के निर्माण से देशभर के श्रद्धालु भगवान राम के दर्शन करने के लिए अयोध्या आ सकेंगे।

मंदिर के निर्माण से भारत में धार्मिक सद्भाव और शांति को बढ़ावा मिलेगा। मंदिर के निर्माण से भारत की छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगी।

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dharati moradiya

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